कोर्ट के आदेश पर दखल-दिहानी कराने पहुंचे सीओ का घेराव, ढाई घंटे देर से पहुंचने पर भड़का लोगों का गुस्सा
कोर्ट के आदेश पर दखल-दिहानी कराने पहुंचे सीओ का घेराव, ढाई घंटे देर से पहुंचने पर भड़का लोगों का गुस्सा

कोर्ट के आदेश पर दखल-दिहानी कराने पहुंचे सीओ का घेराव, ढाई घंटे देर से पहुंचने पर भड़का लोगों का गुस्सा

विकास कुमार प्रभारी बिहार
44 साल पुराने जमीन विवाद में कार्रवाई के लिए पहुंची थी प्रशासनिक टीम, कोर्ट अधिकारी लौटे बैरंग; पीड़ितों ने मंत्री पर लगाया प्रभाव के दुरुपयोग का आरोप
सहरसा।
नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 41 में रविवार को 44 साल पुराने जमीन विवाद में कोर्ट के आदेश पर दखल-दिहानी कराने पहुंचे कहरा अंचलाधिकारी निरंजन कुमार मिश्रा को स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों के विरोध का सामना करना पड़ा। निर्धारित समय से करीब ढाई घंटे देर से पहुंचे सीओ की गाड़ी का लोगों ने घेराव कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों ने सीओ पर पक्षपात का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया।
जानकारी के अनुसार, सहरसा व्यवहार न्यायालय के आदेश पर 26 जुलाई 2026 को विवादित जमीन को खाली कराकर पीड़ितों को दखल दिलाने की कार्रवाई तय थी। सुबह 11 बजे ही पुलिस बल और कोर्ट के अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे, लेकिन मजिस्ट्रेट के रूप में प्रतिनियुक्त कहरा सीओ समय पर नहीं पहुंचे। करीब ढाई घंटे बाद दोपहर 1:30 बजे सीओ के पहुंचने तक इंतजार करने के बाद कोर्ट के कई अधिकारी बैरंग लौट चुके थे। इसी बात से आक्रोशित स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों ने सीओ की गाड़ी को घेरकर विरोध जताया।
पीड़ितों के अनुसार, यह जमीन विवाद वर्ष 1982 से चला आ रहा है। बरियाही निवासी 72 वर्षीय मो. इदरीश अंसारी और वार्ड 41 निवासी 70 वर्षीय प्रमोद कुमार पासवान का दावा है कि उन्होंने वर्ष 1982 में पंचगछिया निवासी वेदानंद झा और निर्मला देवी से 7 कट्ठा 18 धुर 5 धुरकी जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। आरोप है कि प्रमोद पासवान की जमीन पर बाउंड्री कराने के बाद कुछ महादलित परिवारों ने उनके घर में आग लगाकर अवैध कब्जा कर लिया। वहीं, इदरीश अंसारी की जमीन पर भी कई परिवारों के जबरन कब्जा जमाने का आरोप है।
पीड़ितों ने बताया कि कब्जे के खिलाफ उन्होंने सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। 1 अगस्त 1998 को सहरसा कोर्ट के सब-जज तृतीय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका भी खारिज हो गई। 30 सितंबर 2024 को सब-जज प्रथम की अदालत ने जिला प्रशासन को अवैध कब्जा हटाकर पीड़ितों को दखल-दिहानी कराने का आदेश दिया। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर 11 मई 2026 को कोर्ट ने दोबारा कहरा सीओ और जिला प्रशासन को जमीन खाली कराने का निर्देश दिया।
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि विवादित जमीन पर बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा का मकान भी बना हुआ है और उनके प्रभाव के कारण कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हो पा रहा है। पीड़ितों का दावा है कि उन्होंने मामले की शिकायत जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्री तक की है, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है।
वहीं, कहरा सीओ ने अपने ऊपर लगाए गए पक्षपात और अन्य आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है। मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और कोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन को लेकर अब लोगों की नजर आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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