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सुपौल बिहार खाखी वर्दी की मनमानी से परेशान,पीड़िता ने लगाई न्यायालय से गुहार।

खाखी वर्दी की मनमानी से परेशान,पीड़िता ने लगाई न्यायालय से गुहार।

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रिपोर्ट:-बलराम कुमार सुपौल बिहार।

एंकर:-मामला सुपौल जिला के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय मुख्यालय अंतर्गत लातोना दक्षिण पंचायत के तितुवहा में चल रहे- SBI-बैंक के -मिनी बैंक-संचालक के साथ खाखी वर्दी द्वारा अपनी मनमानी करते हुए परेशान करने पर पीड़िता द्वारा न्यायालय से गुहार लगाने की है।
पीड़िता ने बताया की मधेपुरा जिला के शंकरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रहने वाली एक खाता धारक ने मेरे यहां मिनी बैंक से रुपया निकालने आया था।
उनके खाता में पच्चीस हजार रुपए हीं थे जिसे मेरे द्वारा निकालकर दे दिया गया।
लेकिन खाताधारक ने बताया की मेरे खाता में पैंतालीस हजार रुपया था।
तो मेरे द्वारा जांच कर बताया गया की आपका रुपया सुबह समय दस हजार रुपए करके दो बार में बीस हजार पूर्व में निकाला जा चुका है।
वहीं मेरे द्वारा ब्रांच मैनेजर को आवेदन देकर जाँच कर बताने को बोला तो उन्होंने बताया की रूपया किसी एप के द्वारा दूसरे आईडी से निकाला जा चुका है।
बाद खाताधारक द्वारा अपने क्षेत्रीय थाना शंकरपुर में झूठी आवेदन दिया की तितुवहा मिनी बैंक संचालक मेरा बिस हजार रुपया निकाल लिया है।
वहीं पीड़िता ने बताया की शंकरपुर थाना में प्राप्त आवेदन पर मुझे थाना के अधिकारी द्वारा दुरभाष कर बुलाया गया।
बाद पहुँचने पर थानाध्यक्ष द्वारा खाखी वर्दी का रॉब दिखाते हुए बिना किसी जाँच पूछताछ के मुझे बंद कर दिया बोला-420-में जैल भेज दूँगा।
बाद साथ में आए मेरे साथी द्वारा घर फोन कर समाज के कुछ लोगों को थाने पर बुलाया गया।
घर से आए लोगों ने थानाध्यक्ष से मिनी बैंक संचालक को छोड़ने के लिए न्याय की गुहार लगाई।
लेकिन खाखी वर्दी अपनी रॉब दिखाते हुए अपनी मनमानी करते रहे।
बाद काफी मसकद के बाद -49-हजार-500-रुपए लेकर छोड़ा गया।
वहीं मिनी बैंक पर आए कुछ खाताधारकों से पूछा गया की आप कई सालों से रुपए निकालने आते हैं आपलोगों के साथ कभी हेराफेरी भी हुई है।
तो खाताधारकों ने बताया की मिनी बैंक संचालक अच्छे हैं उनपर झूठा आरोप लगाया गया है।
वहीं पीड़िता ने खाखी वर्दी की मनमानी के खिलाफ न्यायालय से न्याय की लगाई गुहार।
साथ हीं पत्रकार द्वारा थानाध्यक्ष के सरकारी दूरभाष पर कई बार सम्पर्क करने की कोशिश की गई लेकिन बार बार बंद हीं पाया गया।
अब देखना लाजमी होगा की क्या पीड़िता को न्याय मिल पाता या नहीं।
हालांकि ये जाँच का विषय है।

anupam

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