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आगरा पैनिक नाहो, मंकीपॉक्स का वायरस कोरोना की तरह नहीं फैलता : राजेश खुराना

पैनिक नाहो, मंकीपॉक्स का वायरस कोरोना की तरह नहीं फैलता : राजेश खुराना

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अरविंद कुमार श्रीवास्तव रिपोर्ट

आगरा। जनमानस का अभी कोरोना महामारी से भी पीछा छूटा नहीं कि एक नई बीमारी का प्रकोप दुनिया में शुरू हो गया। इस बीमारी का नाम है मंकीपॉक्स वायरस। यह कोरोना वायरस से अलग हैं। डरे नहीं, डब्ल्यूएचओ ने मंकीपॉक्स वायरस को महामारी मानने से इनकार किया हैं।

इस संदर्भ में आगरा स्मार्ट सिटी,भारत सरकार के सलाहकार सदस्य एवं उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति लखनऊ के सचिव व हिन्दू जागरण मंच, ब्रज प्रान्त उ.प्र. के प्रदेश संयोजक, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के जिला उपाध्यक्ष व आत्मनिर्भर एक प्रयास के चेयरमैन व सुप्रशिद्ध समाज सेवक राजेश खुराना ने कहा कि मंकीपाक्स एक अलग वायरस हैं। इसलिए पैनिक ना हों। मंकीपॉक्स का वायरस कोरोनावायरस की तरह नहीं फैलता हैं। मंकीपॉक्स को कोरोना के बाद दूसरी महामारी मानना जल्दबाजी होगी। मंकीपॉक्स वास्तव में चेचक की तरह होने वाला एक दुर्लभ वायरस संक्रमण हैं। यह पिछली बार 1958 में अनुसंधान के लिए रखे गए बंदरों में खोजा गया था। चूंकि एक बार बंदर के बीच यह बीमारी फैली थी। इसलिए उसका नाम मंकीपॉक्स रखा गया। मानव में मंकीपॉक्स का पहला मामला 1970 में सामने आया था। यह रोग मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबधीय वर्षावन क्षेत्रों में होता है। यह वायरस फॉक्सविरिडे परिवार से संबंधित है। इसमें चेचक रोग पैदा करने वाले वायरस भी शामिल है। पिछले कुछ दिनों से दुनिया के कई देशों में मंकीपॉक्स के मामले लगातार सामने आ रहे हैं अथवा संक्रमण महामारी के बाद मंकीपॉक्स के मामलों में बढ़ोतरी देखते हुए डब्ल्यूएचओ का कहना है कि ऐसे में इससे महामारी होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऐसा मानने से साफ इंकार किया है। बता दें कि मंकीपॉक्स अब तक 24 देशों में चुका है और इसके 335 मामले दर्ज किए गए हैं।

श्री खुराना ने आगे बताया कि इन हालात को देखते हुए संभावना है कि या वैश्विक महामारी का रूप ले सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार अफ्रीका से बाहर मंकीपॉक्स के बढ़ रहे मामलों को लेकर कई देशों के बारे में जानकारी अभी नहीं है। अभी तक मंकीपॉक्स वायरस की जेनेटिक संरचना के बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों को अधिक जानकारी नहीं है। बता दें कि मंकीपॉक्स का वायरस कोरोनावायरस की तरह नहीं फैलता हैं। डब्ल्यूएचओ की टेक्निकल अधिकारी लेविस ने कहा कि इस वक्त हम वैश्विक महामारी को लेकर चिंतित नहीं है। यह वायरस पहली बार एक समलैंगिक व्यक्ति से मिला हैं। वैसे इस बात की अभी पुष्टि नहीं हुए कि यह वायरस सेक्सुअली फैलता है। लेविस ने लोगों को सतर्क किया और कहा सभाविक तौर पर दुनिया के पास इस महामारी को रोकने का अवसर है। इस को लेकर कीसिल्वी ब्रायन्ड ने बताया कि “हम नहीं जानते कि कोविड-19 की तरह मंकीपाक्स को भी महामारी जैसा समझ लोगों में डर फैले या पैनिक हो”। उन्होंने बताया कि मंकीपाक्स एक अलग वायरस हैं। इसलिए पैनिक ना हों। विश्व में मंकीपाक्स के बढ़ते मामलों पर मोदी सरकार बेहद सक्रिय है। इस संदर्भ में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि भले ही देश में मंकीपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है लेकिन गैर स्थानिक देशों में इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए तैयार रहने की जरूरत है। इस में संक्रमण की संभावना वाले क्षेत्रों और संक्रमण के स्रोत्र वाले क्षेत्रों में निगरानी और तेजी से मामलों की पहचान पर विशेष जोर दिया जा रहा हैं।

anupam

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