आगरा हाईकोर्ट ने कोरोना के मामलों को देखते हुए वर्चुअल सुनवाई का निर्णय लिया,

अरविंद कुमार श्रीवास्तव रिपोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों की कोर्ट परिसर में एंट्री वर्जित रहेगी : सीनियर अधिवक्ता अरविंद पुष्कर
आगरा। देश में तेजी से तीसरी लहर का असर अब हाईकोर्ट पर भी दिखाई देने लगा है। वहीं,हाईकोर्ट के आठ जज कोविड संक्रमित होने की बजह से इलाहाबाद हाईकोर्ट व लखनऊ पीठ में कल से सिर्फ वर्चुअल सुनवाई का निर्णय लिया हैं। कोविड के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए कल से वर्चुअल सुनवाई होगीं और कुछ समय के लिये इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं की कोर्ट परिसर में एंट्री वर्जित रहेगी। यह निर्णय कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लिया गया है।
इस संदर्भ में सीनियर अधिवक्ता अरविंद पुष्कर ने बताया कि देश में तेजी से तीसरी कहर के बढ़ते असर अब हाईकोर्ट पर भी दिखाई देने लगा है,हालांकि हाईकोर्ट ने पहले ही सुझाव दिया था कि चुनाव को अभी टाल देना चाहिए और रैलियों को टीवी और न्यूज पेपर के जरिए ही करने की अनुमति चुनाव आयोग दे लेकिन चुनाव आयोग ने सुझाव को दरकिनार करते हुए चुनाव का ऐलान कर दिया। अब हाईकोर्ट ने कोरोना के मामलों को देखते हुए वर्चुअल सुनवाई का निर्णय लिया है। अब हाईकोर्ट में दस जनवरी से केवल वर्चुअल सुनवाई होगी। यह निर्णय कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लिया गया है। इस संबध में रविवार को हाईकोर्ट की प्रशासनिक कमेटी और एसोसिएशन की ऑनलाइन बैठक हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि कोरोना की जिस तरह से रफ्तार बढ़ रही है। उससेे वर्चुअल मीटिंग ही बचाव का रास्ता है। बैठक की अध्यक्षता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने की, वहीं मीटिंग में वर्चुअल सुनवाई का विरोध भी हुआ। ऑनलाइन सुनवाई में कई खामियां है। अधिवक्ताओं ने उन खामियों को भी मुख्य न्यायाधीश के सामने रखा। हालांकि न्यायाधीश ने वकीलों को आश्वस्त किया कि दिक्कतों को दूर किया जाएगा, साथ ही नो एडवर्स का आदेश प्रभावी होगा। इसके साथ अगर बेल आदि के मामलों में किसी कारणवश सुनवाई नहीं हो पाती है तो केस अगले दिन सूचीबद्ध किया जाएगा। जबकि याचिकाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरह से होगी। कोविड की तीसरी लहर में अब तक आठ जजों के संक्रमित होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रशासन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट व लखनऊ पीठ में 10 जनवरी से सिर्फ वर्चुअल सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इससे पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट 3 जनवरी से वर्चुअल सुनवाई का फैसला लिया गया था। मगर, लिंक न मिलने पर वकीलों के विरोध के कारण फैसला वापस ले लिया गया था।
श्री पुष्कर ने कहा कि अब कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए फिर से वर्चुअल सुनवाई का फैसला लिया गया है। मुकदमों का दाखिला ऑनलाइन और शारीरिक दोनों मोड में किया जाएगा। बार एसोसिएशन के अनुसार अगले 15 दिनों तक केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई होगी। इसके बाद स्थिति का आकलन किया जाएगा। बैठक में पता चला कि इलाहाबाद हाईकोर्ट व लखनऊ पीठ के 8 न्यायाधीशों के अलावा कोर्ट के विभिन्न कर्मचारी और रजिस्ट्री के सदस्य भी संक्रमित हुए हैं। अभी तक हाईकोर्ट में हाइब्रिड मोड से यानी वर्चुअल और फिजिकल दोनों तरीके से सुनवाई हो रही थी। इसके पहले 3 जनवरी से इलाहाबाद हाईकोर्ट और इसकी लखनऊ बेंच में केसों की वर्चुअल सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया गया था। हालांकि इसे लेकर अधिवक्ताओं ने जमकर विरोध जताया, जिसके बाद चीफ जस्टिस ने अपने आदेश को वापस ले लिया था। इसके पहले भी कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट और इसकी लखनऊ बेंच में मुकदमों की सुनवाई वर्चुअल मोड में की गई थी। देश और प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण में कमी आ जाने के बाद केसों की फिजिकल सुनवाई करने की हाईकोर्ट ने अनुमति दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच लिए गाइडलाइन बनायी हैं, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों की कोर्ट परिसर में एंट्री वर्जित रहेगी।लखनऊ बेंच के वकीलों की कोर्ट परिसर में एंट्री वहां के सीनियर जज के निर्देश पर सीनियर रजिस्ट्रार कंट्रोल करेंगे। जजों के स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के परिसर में प्रवेश को नियंत्रित किया जाएगा। रजिस्ट्रार जनरल तय करेंगे कि कितने अधिकारी या कर्मचारी को कोर्ट आना है। रविवार को मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अध्यक्षता में वरिष्ठ जजों व बार के प्रतिनिधियों की हुई वर्चुअल बैठक में यह निर्णय लिया गया।
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