वैश्य समाज ने मनाई महात्मा गांधी की पुण्यतिथि।
वैश्य समाज ने मनाई महात्मा गांधी की पुण्यतिथि।

*संवाददाता :-* विकास कुमार सहरसा (बिहार)।
*स्टोरी :-* वैश्य समाज ने मनाई महात्मा गांधी की पुण्यतिथि। नेता और कार्यकर्ता हुए शामिल, कहा- बापू के आदर्श को आगे बढ़ाना हमारा उद्देश्य।
*एंकर :-* दुनिया को अहिंसा और स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की 76 वी. शाहदात दिवस समारोह आज सहरसा शहर के चिकित्सक डाक्टर शैलेन्द्र कुमार के सभागार मे वैश्य समाज सहरसा के द्वारा मनाई गई.
इस अवसर पर वैश्य नेताओं ने सर्वप्रथम गांधी जी के तैलीय चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर नमन किया गया।
तत्पश्चात 2 मिनट तक मौन धारण कर गांधी जी को श्रद्धांजलि दी गई। वहीं सवों ने गांधी जी की प्रार्थना रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीताराम… गाकर गांधी जी के विचारों से आत्मसात करने की शपथ ली।
मौके पर वैश्य समाज के जिला अध्यक्ष रामकृष्ण साह उर्फ मोहन साह ने कहा कि सत्य एवं अहिंसा के अद्भूत मंत्र से समस्त भारत को स्वतंत्रता के पावन ध्येय के लिए जागृत करने वाले साबरमती के संत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का आज़ पुण्यतिथि है। इस मौके पर उन्हें शत शत नमन। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष बापू की पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन उनके आदर्शों को याद किया जाता है, जब मां भारती के इस महान सपूत ने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। बापू के आदर्श एक समृद्ध व करुणामय समाज का निर्माण करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि गांधी की हत्या तो की जा सकती है, लेकिन उनके विचारों की हत्या कभी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि कि महात्मा गांधी के विचार आज़ भी प्रासंगिक हैं। बदलते वक्त में आज के युवाओं को लिए गांधी जी बताएं गए मार्ग पर चलना चाहिए।
भाजपा चिकित्सक प्रकोष्ठ के संयोजक डाक्टर शैलेन्द्र कुमार ने बापू के जीवनी पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने सत्य एवं अहिंसा के बल पर देश के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों को सहीं मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। एवं लड़ाई के लिए मार्गदर्शन दिया। यह उन्हीं का परिणाम था कि सत्य एवं अहिंसा के कारण ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि सहरसा में भी महात्मा गांधी के कदम पड़े थे। जहां उन्होंने अपना बसेरा डाला था। वह आज भी है। लेकिन उस स्थल को को संरक्षित करने की आवश्यकता है।
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