फिरोजाबाद 74 वें गणतंत्र दिवस पर स्कूली छात्र छात्राओं ने किए रंगारंग कार्यक्रम
74 वें गणतंत्र दिवस पर स्कूली छात्र छात्राओं ने किए रंगारंग कार्यक्रम

अरविंद कुमार श्रीवास्तव रिपोर्ट

74 वें गणतंत्र दिवस पर स्कूली छात्र छात्राओं ने किए रंगारंग कार्यक्रम
स्कूल के मेधावी छात्र छात्राओं को किया गया साइकिल वितरण का कार्यक्रम
मेधावी छात्र छात्राओं को साइकिल पुरस्कार मिलते ही खिले चेहरे
आगरा-!आगरा जनपद के कोतवाली डौकी क्षेत्र के स्प्रिंगफील्ड इंटर कॉलेज कुडोल व डीएवी इंटर कॉलेज कुंडोल में 74 वे गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर कॉलेज के मेधावी छात्र छात्राओं को डॉक्टर नाहर सिंह व अनुपम चौहान महिला मोर्चा मंत्री भाजपा ने साइकिल वितरण करके किया सम्मानित, सम्मानित होते ही मेधावी छात्र छात्राओं के चेहरे खिले नजर आए और 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर कॉलेज के छात्र छात्राओं ने देश भक्ति संगीत व सुंदर-सुंदर नृत्य कर रंगारंग कार्यक्रम किया और स्प्रिंगफील्ड के डायरेक्टर पीसी शर्मा ने बताया है कि भारत में 26 जनवरी 2023 को 74 वां गणतंत्र दिवस पर इस साल भारत पूरे देश मे 74वां गणतंत्र दिवस मनाया गया। और देश की आजादी के लिए देश के वीर सपूतो ने अपने प्राणों की आहुति दी, ताकि हम स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जी सकें। 74वें गणतंत्र दिवस पर, शहीदों को याद करें क्योंकि हम अपनी मातृभूमि की रक्षा करने और उसे मनाने का वादा करते हैं। गणतंत्र दिवस यह गणतंत्र दिवस 26 जनवरी, 1950 को भारत के संविधान को अपनाने और देश के गणतंत्र में परिवर्तन का प्रतीक है। हर साल, इस दिन को मनाने वाले समारोह में शानदार स्कूली प्रतिमा और प्रिया ने छात्राओं ने सैन्य कर्मियों जैसा बहुत ही सुंदर नृत्य किया और स्कूल में सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम हुआ।मुख्य अतिथि के रूप में आए भारतीय करणी सेना मंत्री भाजपा अनुपम चौहान ने बताया कि देश की आजादी को स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा इसे अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसे लागू करने के लिये 26 जनवरी की तिथि को इसलिए चुना गया था। क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।
इस दिन हर भारतीय अपने देश के लिए प्राण देने वाले अमर वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व पर स्कूलों, कॉलेजों आदि मे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारत देश की राष्ट्रीय इमारत एवं स्कूल कॉलेजों को सुंदर तरीके से सजाया जाता है।देश के कोने कोने के लोग स्कूल कॉलेजों में 26 जनवरी की एनसीसी परेड स्कूली बच्च सुंदर-सुंदर प्रस्तुतियां करते हैं। अपने देश में भारतीय सेना अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन होता है। 26 जनवरी के दिन धूम-धाम से बहुत से मनमोहक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
देश के हर कॉलेज एवं राष्ट्रीय इमारतों पर जगह जगह ध्वजवन्दन होता है और कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विश्व भर में फैले हुए है भारतीय मूल के लोग तथा भारत के दूतावास भी गणतंत्र दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनातें हैं। भारत के हर कोने कोने में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस मनाया जाता है , और देश के प्रति एक नई उमंग देखने को मिलती है ।गणतंत्र दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि 26 जनवरी 1950 को पूरे 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगा कर बनाया गया संविधान लागू किया गया था और हमारे देश भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया।
वेसे तो हमारा देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज़ों के चंगुल से आज़ाद हो गया था परंतु इस आज़ादी को रूप 26 जनवरी को दिया गया। तब से अब तक हम इस दिवस को आज़ादी के दिन के रूप मे मनाते है आज हमे आज़ादी मिले हुए पूरे 75 साल हो चुके है।
हमारे देश की आज़ादी किसी भी एक व्यक्ति के कारण नहीं हुई हमारे देश की आज़ादी बहुत सारे भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, अशफ़ाक उल्ला खां, आज़ाद आदि जैसे महान पुरूषो के अपनी जान परवाह न करते हुए देश के खातिर बलिदान हो गए। देश भक्त अपने देश को गुलामी की ज़नज़ीरो से बंधा ना देख सके अपने देश को आज़ाद कराने के लिए उन्होने अपने प्राण तक त्याग दिये उनके बलिदानों के कारण अंग्रेज़ों को अपने घुटने टेकने पड़े और उन्होने भारत को आज़ाद कर दिया।गणतंत्र दिवस के दिन हम इन महान पुरुषों के बलिदान को याद करते हैं और प्रेरणा लेते है कि हम भी इन्ही महान पुरुषों की तरह अपने देश के लिए अपने प्राण त्याग देंगे उसकी आन मान और शान की रक्षा के लिए हर समय तय्यार रहेंगे और दोबारा कभी अपने देश को गुलामी की ज़नज़ीरो में बंधने नहीं देंगे हम सब को इन देश भक्तो से प्रेरणा लेनी चाहिए और देश की हिफाज़त के लिए तैयार रहना चाहिए। गणतंत्र दिवस को मनाने का एक उद्देश्य है कि हम महान पुरुषों के बलिदान को याद करके उनसे प्रेरणा लेते है। जलिया वाले बाग में भी वीरों ने अपने प्राण देश के खातिर नौ छावर किए थे और प्रत्येक भारत वासियों को भारत के शहीदों से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने देश को ऊँचाइयो तक पहुंचाने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए और हर भारतीय का कर्तव्य बनता है कि वह देश के विकास के लिए अपना पूरा योगदान दे और देश की रक्षा के लिए हर समय खड़ा रहे।अनुपम चौहान ने डीएवी महाविद्यालय में और स्प्रिंगफील्ड में मेधावी छात्र छात्राओं को साइकिल वितरण करके किया सम्मानित सम्मानित करते हुए अनुपम चौहान ने बताया कि सन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्तयोपनिवेश (डोमीनियन) का पद प्रदान नहीं करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित एकाई बन जाने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। इसके पश्चात स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1946 से आरंभ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। डॉ० भीमराव अम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयाँ थी जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ० भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26 नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई। जैसा कि आप सभी जानते है कि 15 अगस्त 1947 को अपना देश हजारों देशभक्तों के बलिदान के बाद अंग्रेजों की दासता (अंग्रेजों के शासन) से मुक्त हुआ था। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को अपने देश में भारतीय साशन और कानून व्यवस्था लागू हुई। भाईयो और बहनों ने इस स्वतन्त्रता को पाने में अपने देश की हजारों-हजारों माताओं की गोद सूनी हो गई थी, हजारों बहनों बेटियों के माँग का सिंदूर मिट गया था, तब कहीं इस महान बलिदान के बाद देश स्वतंत्र हो सका था। जिस तरह देश का संविधान है, ठीक उसी तरह परमात्मा का भी संविधान है, यदि हम सब देश की संविधान की तरफ परमात्मा के संविधान का पालन करें तो समाज अपराध मुक्त व सशक्त बन सकता है। स्कूल के रंगारंग कार्यक्रम मैं मौजूद डॉक्टर नाहर सिंह पूर्व प्रधान नीरू सिंह, अंजलि, संजना कुमारी ,कुमारी आस्था, प्रियांशु ,साक्षी ,मेधावी छात्र छात्रा को साइकिल पुरस्कार के साथ किया सम्मानित और तमाम स्कूली बच्चे और ग्रामीण लोग मौजूद रहे।
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