आगरा महंगाई आसमान पर ऊपर से कमीशन खोरी, कैसे “पढ़ेगा इंडिया और बढ़ेगा इंडिया”
महंगाई आसमान पर ऊपर से कमीशन खोरी, कैसे "पढ़ेगा इंडिया और बढ़ेगा इंडिया"

अरविंद कुमार श्रीवास्तव फिरोजाबाद रिपोर्ट
आगरा। देवेंद्र कुमार उत्तर प्रदेश प्राइवेट स्कूल मनमानी एनसीआरटी किताब प्राइवेट स्कूल की मनमानी राइटर बदलकर कमीशन खोरी हो रही है जिसस अभिभावकों जेब पर डाका।में इस समय महंगाई चरम सीमा पर है रसोई से लेकर खेत खलियान तक और शिक्षा से लेकर उपचार तक हर वस्तु पर पहले की अपेक्षा अब मूल्य में वृद्धि हो गई है। कोरोना काल के 2 वर्षों में मानव जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है रोजगार कोसों दूर चला गया है। मध्यम वर्ग के लोग खाने के लिए मोहताज हो गए हैं ऊपर से कमीशन खोरी की मार भी झेलनी पड़ रही है। जी हां चौंकिए मत हम बात कर रहे हैं इस समय निजी स्कूल संचालकों की स्कूल संचालकों ने शिक्षा को रोजगार बना दिया है। बीच चौराहे पर शिक्षा को बेचा जा रहा है और इस काले कारोबार को शिक्षा विभाग के आला अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं।
सरकार की मंशा है कि “पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया” की मुहिम को निजी स्कूल संचालक पलीता लगा रहे हैं। इस बढ़ती महंगाई में बच्चों के स्कूल में एडमिशन और स्टेशनरी के कमीशन खोरी का बोझ गरीब के परिवार पर बढ़ गया है। योगी शासन में कब तक कमीशन खोरी से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को छुटकारा मिल पाएगा। कस्बा एत्मादपुरमें शिक्षा को खुलेआम बेचने का कारोबार किया जा रहा है। दर्जनभर बिना मान्यता के स्कूल संचालित हैं इन स्कूलों की ऊंची ऊंची बिल्डिंग बनाकर खुलेआम शिक्षा माफिया शिक्षा का सौदा करते नजर आते हैं। शिक्षा के साथ खिलवाड़ और सरकार की नीतियों की धज्जियाँ उड़ाने वाले शिक्षा माफिया बेखौफ होकर शिक्षा के कारोबार को दिन-रात बढ़ावा दे रहे हैं। निजी स्कूल संचालक एडमिशन, किताब, ड्रेस और फीस के नाम पर बच्चों के परिजनों से लूट कर रहे हैं। हाल ही में योगी सरकार ने आदेश जारी किया था कि कोई भी स्कूल संचालक अपने स्कूल से किताब कॉपी और ड्रेस की बिक्री नहीं करेगा। लेकिन कमीशन खोरी में संलिप्त निजी स्कूल संचालकों ने चुनिंदा दुकानों पर ही अपनी किताब सेट बिक्री के लिए रख दिए हैं। इन किताबों की बिक्री के लिए दुकानदारों से स्कूल संचालक मोटा कमीशन हड़प रहा है। कमीशन खोरी के इस कारोबार को शिक्षा विभाग के अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं।
= अंबेडकर यूनिवर्सिटी छात्र नेता हिमांशु पांडे एडवोकेट कहना है कि प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए योगी सरकार की मुहिम चलाई जा रही है। प्रदेश के मुखिया ने हाल ही में आदेश जारी किया था कि स्कूल संचालक अपने स्कूल से ड्रेस और किताब की बिक्री नहीं करेंगे। स्कूल संचालकों ने प्रदेश के मुखिया के आदेश का पालन तो किया लेकिन किताब और ड्रेसों पर महंगाई और बढ़ गई है। पहले तो स्कूल वाले ही कमीशन लेते थे अब दुकानदार का भी कमीशन बढ़ गया है इसलिए कमीशन खोरी में संलिप्त स्कूल संचालकों की सूची बनाई जा रही है जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर शिकायत की जाएगी। भाजपा सरकार गरीबों की मसीहा है और गरीबों के हित में होने वाले फैसलों पर अगर कोई भ्रष्टाचार या कमीशन खोरी करता है उसके खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
=शिक्षक केशव सिंह ने कहा कि प्रदेश की योगी सरकार ने जो निर्णय लिया है स्कूलों से किताब और ड्रेस ना बेचने का निर्णय सही लिया गया है लेकिन स्कूल संचालक इस आदेश का दुरुपयोग कर रहे हैं। शिक्षा को रोजगार बनाने वाले ऐसे कान्वेंट और निजी स्कूलों पर सरकार को जल्द ही बड़ा फैसला लेना चाहिए। प्राइमरी विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की और जिम्मेदारी बढ़ायी जाए। प्रत्येक सरकारी शिक्षक को स्कूल के आसपास के क्षेत्रों से अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा देने का कार्य सौंपा जाए। जिससे खुलेआम शिक्षा का सौदा करने वाले माफियाओं पर लगाम लग सके।
=समाजसेवी राकेश वर्मा का कहना है कि पहले स्कूल संचालक अपने स्कूल का प्रचार प्रसार करते थे तो लिखते थे कि हमारे यहां उच्च शिक्षा दी जाती है लेकिन अब शिक्षा माफिया अपने स्कूल का प्रचार प्रसार के लिए लिखते हैं कि हमारे यहां बच्चा 100% पास किया जाता है। भ्रष्टाचार को बढ़ावा यहीं से मिल रहा है प्रदेश सरकार को जल्द ही इस पर अमल करना चाहिए और शिक्षा को एक समान करना चाहिए प्रत्येक विद्यालय में फीस का दायरा लिमिट में होना चाहिए। जिससे बेरोजगारी पर लगाम लग सके और मेहनत करने वाले छात्र-छात्राओं को कंपटीशन क्वालिफाइड करके अच्छी नौकरी मिल सके।
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