पाकुड: मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार : प्रवेक्षिका आगाता हासदा

पाकुड़ से राजकुमार भगत की रिपोर्ट
पाकुड़ । विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतिम दिन पर पाकुड़िया प्रखंड के बाल विकास परियोजना के महिला पर्यवेक्षिका आगाता हांसदा ,मंदोदरी देवी ,चित्र लेखा कुमारी एवं पिरामल स्वास्थ्य के प्रखंड परिवर्तन पदाधिकारी मनोज महतों के नेतृत्व में गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को जागरूक एवं प्रायोगिक हेतु प्रखंड के सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती एवं धात्री माताओं का गृह भ्रमण किया गया । सेविकाओं द्वारा उनको जागरूक कर बताया गया कि शिशु के शरीर में आते ही 5 माह से पाचक रस बनना शुरू करती हैं। स्वस्थ ग्रंथियों का विकास होता हैं। स्तनपान से जीवन के बाद के चरणों में रक्त कैंसर ,मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता हैं । स्तनपान से शिशु की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ती हैं, शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता हैं ।इसके अलावा माँ के दूध में कई प्रकार के प्राकृतिक रसायन भी मौजूद होते हैं जो शिशु के लिए माँ का दूध सम्पूर्ण रूप से स्नेह का प्रतीक व अमृत के समान हैं ।छह महीने तक नवजात शिशु को लगातार माँ का दूध पिलाना चाहिए एवं पानी के एक भी बूंद भी नहीं देना चाहिए .। बताया गया की सरकार के दिशा -निर्देश के अनुसार गर्भवती एवं धात्री माताएँ भी कोविड का टीकाकरण लगवा सकती हैं ।जो की गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए यह बिल्कुल स्वस्थ एवं सुरक्षित हैं ।
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